काव्य और अलंकार (Poetics)
शब्द शक्ति (Word Power)
Download PDFशब्द की वह सामर्थ्य जिससे अर्थ का बोध होता है — अभिधा, लक्षणा और व्यंजना।
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वह शेर है — इस वाक्य में शेर का अर्थ जंगल का पशु नहीं, साहसी व्यक्ति है। पर पाठक तक यह अर्थ पहुँचा कैसे? शब्द वही रहा, अर्थ बदल गया।
शब्द की जिस सामर्थ्य से अर्थ का बोध होता है, उसे शब्द शक्ति कहते हैं। इसके तीन भेद हैं — अभिधा, लक्षणा और व्यंजना।
| शक्ति | अर्थ का नाम |
|---|---|
| अभिधा | वाच्यार्थ या मुख्यार्थ |
| लक्षणा | लक्ष्यार्थ |
| व्यंजना | व्यंग्यार्थ |
1. अभिधा
जिस शक्ति से शब्द का सीधा, कोशगत अर्थ समझ में आता है। यह सबसे प्रथम और सबसे सामान्य शक्ति है; साधारण बोलचाल इसी पर चलती है।
वाक्य में
राम ने आम खाया।
यहाँ आम का अर्थ फल ही है — न कम, न अधिक। यह अभिधा है।
अभिधा जिस अर्थ को देती है, उसे वाच्यार्थ या मुख्यार्थ कहते हैं।
2. लक्षणा
जब मुख्यार्थ बाधित हो जाए — अर्थात् सीधा अर्थ लेने पर वाक्य असंगत हो जाए — तब मुख्यार्थ से जुड़ा कोई दूसरा अर्थ लिया जाता है। यही लक्षणा है, और वह दूसरा अर्थ लक्ष्यार्थ।
वाक्य में
मेरा घर गंगा में है।
सीधा अर्थ लें तो घर नदी के जल में होगा — असंगत। अतः लक्ष्यार्थ लिया जाएगा: घर गंगा के तट पर है। साथ ही एक प्रयोजन भी सधता है — तट की पवित्रता और शीतलता का बोध।
वाक्य में
वह गधा है।
मुख्यार्थ बाधित है, क्योंकि कोई व्यक्ति पशु नहीं हो सकता। लक्ष्यार्थ — वह मूर्ख है।
लक्षणा के दो मुख्य भेद हैं।
| भेद | आधार | उदाहरण |
|---|---|---|
| रूढ़ा लक्षणा | प्रयोग रूढ़ि से चला आ रहा हो | कुशल — मूलतः कुश काटने में निपुण, अब हर निपुण |
| प्रयोजनवती लक्षणा | किसी विशेष प्रयोजन से अर्थ बदला जाए | गंगा में घर — पवित्रता का प्रयोजन |
3. व्यंजना
जहाँ वाच्यार्थ और लक्ष्यार्थ दोनों से हटकर कोई तीसरा अर्थ ध्वनित हो, वहाँ व्यंजना शक्ति होती है। वह अर्थ कहा नहीं जाता, सूझता है।
वाक्य में
सूरज डूब गया।
एक राही से कहा जाए तो अर्थ है — अब ठहर जाइए।
एक श्रमिक से कहा जाए तो अर्थ है — काम बंद कीजिए।
एक प्रतीक्षारत माता से कहा जाए तो अर्थ है — बच्चा अब तक नहीं लौटा।
शब्द वही हैं; अर्थ प्रसंग से ध्वनित हो रहा है। यही व्यंजना है।
व्यंजना से निकलने वाले अर्थ को व्यंग्यार्थ कहते हैं। आचार्य मम्मट ने व्यंग्यार्थ को ही ध्वनि कहकर उसे काव्य की आत्मा माना।
तीनों का भेद एक ही वाक्य से
| वाक्य | शक्ति | अर्थ |
|---|---|---|
| रात हो गई। | अभिधा | रात्रि का समय आ गया |
| वह सिंह है। | लक्षणा | वह वीर है |
| रात हो गई। (अतिथि से) | व्यंजना | अब आपको चलना चाहिए |
काव्य में महत्त्व
| शक्ति | काव्य में भूमिका |
|---|---|
| अभिधा | सूचना देती है — गद्य और विवरण का आधार |
| लक्षणा | मुहावरे, प्रतीक और रूपक इसी से चलते हैं |
| व्यंजना | ध्वनि, अलंकार की चमत्कृति और रस की अनुभूति इसी से |
अभ्यास
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शब्द शक्ति किसे कहते हैं और उसके कितने भेद हैं?
उत्तरशब्द की जिस सामर्थ्य से उसके अर्थ का बोध होता है, उसे शब्द शक्ति कहते हैं। इसके तीन भेद हैं — अभिधा, लक्षणा और व्यंजना।
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“मेरा घर गंगा में है” — इसमें कौन-सी शब्द शक्ति है और क्यों?
उत्तरलक्षणा। मुख्यार्थ बाधित है, क्योंकि घर जल में नहीं हो सकता; अतः लक्ष्यार्थ लिया जाता है — घर गंगा के तट पर है। साथ ही पवित्रता और शीतलता का प्रयोजन भी सधता है।
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अभिधा, लक्षणा और व्यंजना से मिलने वाले अर्थों के नाम बताइए।
उत्तरक्रमशः वाच्यार्थ (मुख्यार्थ), लक्ष्यार्थ और व्यंग्यार्थ।
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मुहावरों का संबंध किस शब्द शक्ति से है?
उत्तरलक्षणा से। मुहावरे में मुख्यार्थ बाधित होता है और लक्ष्यार्थ लिया जाता है, जैसे “नाक कटना” का अर्थ प्रतिष्ठा जाना।
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अतिथि से कहा गया “रात हो गई” किस शक्ति का उदाहरण है?
उत्तरव्यंजना का। यहाँ न वाच्यार्थ पर्याप्त है और न लक्ष्यार्थ; प्रसंग से तीसरा अर्थ ध्वनित होता है — अब आपको चलना चाहिए।
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तीनों शब्द शक्तियों का प्रयोग किस क्रम में होता है?
उत्तरपहले अभिधा, उसके बाधित होने पर लक्षणा, और लक्षणा से भी कुछ शेष रह जाने पर व्यंजना। यह क्रम उलटा नहीं जा सकता।