शब्द विचार (Morphology)
तत्सम और तद्भव (Tatsam & Tadbhav)
Download PDFउत्पत्ति के आधार पर हिंदी शब्दों के भेद — तत्सम, तद्भव, देशज और विदेशी।
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हिंदी के शब्द एक जगह से नहीं आए। कुछ संस्कृत से सीधे उठा लिए गए, कुछ सदियों में घिसकर बदल गए, कुछ इसी भूमि की बोलियों से आए और कुछ विदेशी संपर्क से। उत्पत्ति के आधार पर शब्दों का यही वर्गीकरण तत्सम-तद्भव के नाम से पढ़ाया जाता है।
1. तत्सम शब्द
तत् + सम = उसके समान, अर्थात् संस्कृत के समान। जो शब्द संस्कृत से ज्यों के त्यों हिंदी में आ गए, वे तत्सम कहलाते हैं।
उदाहरण
- अग्नि
- सूर्य
- पुस्तक
- मातृ
- हस्त
- दुग्ध
- कर्ण
2. तद्भव शब्द
तत् + भव = उससे उत्पन्न। जो शब्द संस्कृत से निकले पर समय के साथ रूप बदलकर हिंदी में आए, वे तद्भव कहलाते हैं।
उदाहरण
- आग
- सूरज
- पोथी
- माँ
- हाथ
- दूध
- कान
यह बदलाव एक ही छलाँग में नहीं हुआ। शब्द संस्कृत से पालि-प्राकृत और अपभ्रंश से होते हुए हिंदी तक पहुँचे।
विकास क्रम
संस्कृत हस्त → प्राकृत हत्थ → हिंदी हाथ
संस्कृत अग्नि → प्राकृत अग्गि → हिंदी आग
प्रमुख तत्सम-तद्भव युग्म
| तत्सम | तद्भव |
|---|---|
| अग्नि | आग |
| सूर्य | सूरज |
| दुग्ध | दूध |
| हस्त | हाथ |
| कर्ण | कान |
| मयूर | मोर |
| सप्त | सात |
| अष्ट | आठ |
| ग्राम | गाँव |
| क्षेत्र | खेत |
| मस्तक | माथा |
| चंद्र | चाँद |
| कार्य | काज |
| वर्षा | बरसात |
| गृह | घर |
| पत्र | पत्ता |
| मृत्यु | मौत |
| श्रावण | सावन |
| आश्चर्य | अचरज |
| उज्ज्वल | उजला |
3. देशज शब्द
जो शब्द न संस्कृत से आए, न विदेश से — बल्कि इसी क्षेत्र की बोलियों और लोकभाषा में जन्मे, वे देशज कहलाते हैं। इनका मूल प्रायः खोजा नहीं जा सकता।
उदाहरण
- पगड़ी
- लोटा
- खिड़की
- ठेठ
- कलाई
- झाड़ू
- चिड़िया
कई देशज शब्द ध्वनि के अनुकरण से बने हैं — खटखटाना, भड़भड़, टनटन।
4. विदेशी शब्द
लंबे राजनीतिक और व्यापारिक संपर्क के कारण अनेक भाषाओं के शब्द हिंदी में आकर घुल-मिल गए।
| भाषा | उदाहरण |
|---|---|
| अरबी | अदालत, कानून, किताब, औरत, हिसाब |
| फ़ारसी | आदमी, दुकान, कागज़, चश्मा, ज़मीन |
| तुर्की | कैंची, चाकू, तोप, बेगम, उर्दू |
| अंग्रेज़ी | स्टेशन, डॉक्टर, स्कूल, टिकट, अस्पताल |
| पुर्तगाली | आलमारी, चाबी, बाल्टी, कमीज़, तौलिया |
| फ़्रांसीसी | कारतूस, अंग्रेज़, कूपन |
5. संकर शब्द
जब दो भिन्न भाषाओं के शब्द जुड़कर एक नया शब्द बनाते हैं, उसे संकर शब्द कहते हैं।
| संकर शब्द | स्रोत |
|---|---|
| रेलगाड़ी | रेल (अंग्रेज़ी) + गाड़ी (हिंदी) |
| सीलबंद | सील (अंग्रेज़ी) + बंद (फ़ारसी) |
| टिकटघर | टिकट (अंग्रेज़ी) + घर (हिंदी) |
| जेबकतरा | जेब (फ़ारसी) + कतरा (हिंदी) |
पहचान का अभ्यास
तुलना कीजिए
क्षेत्र — तत्सम (संयुक्त व्यंजन क्ष सुरक्षित)
खेत — तद्भव (वही शब्द, ध्वनि सरल होकर)
खिड़की — देशज (बोली से आया)
खिदमत — विदेशी (अरबी)
अभ्यास
-
तत्सम और तद्भव का शाब्दिक अर्थ बताइए।
उत्तरतत्सम = तत् + सम, अर्थात् “उसके (संस्कृत के) समान” — जो शब्द संस्कृत से ज्यों के त्यों आए। तद्भव = तत् + भव, अर्थात् “उससे उत्पन्न” — जो संस्कृत से निकलकर रूप बदलकर आए।
-
“हस्त” से “हाथ” तक का विकास क्रम लिखिए।
उत्तरसंस्कृत हस्त → प्राकृत हत्थ → हिंदी हाथ। तद्भव शब्द एक छलाँग में नहीं बने, वे पालि-प्राकृत और अपभ्रंश से होते हुए हिंदी तक पहुँचे।
-
देशज शब्द किसे कहते हैं? दो उदाहरण दीजिए।
उत्तरजो शब्द न संस्कृत से आए न विदेश से, बल्कि इसी क्षेत्र की बोलियों और लोकभाषा में जन्मे — जैसे लोटा, खिड़की। इनका मूल प्रायः खोजा नहीं जा सकता।
-
संकर शब्द क्या है? “रेलगाड़ी” का स्रोत बताइए।
उत्तरदो भिन्न भाषाओं के शब्द जुड़कर जो नया शब्द बनाते हैं, उसे संकर शब्द कहते हैं। रेलगाड़ी = रेल (अंग्रेज़ी) + गाड़ी (हिंदी)।
-
“मयूर”, “सावन”, “चाकू” और “ठेठ” का वर्गीकरण कीजिए।
उत्तरमयूर — तत्सम, सावन — तद्भव (तत्सम श्रावण), चाकू — विदेशी (तुर्की), ठेठ — देशज।