मुख्य सामग्री पर जाएँ
Hindi vyakaran

रचना (Composition)

संवाद लेखन (Dialogue Writing)

Download PDF

दो या अधिक पात्रों की बातचीत को लिखित रूप देना, जिसमें भाषा पात्र और प्रसंग के अनुसार बदलती है।

आधार आरंभिक अवधारणा अंतिम बदलाव
इस पृष्ठ में

संवाद वह रचना है जो सुनाई देनी चाहिए। पढ़ते समय लगे कि दो लोग सचमुच बोल रहे हैं — यही उसकी सफलता की कसौटी है।

इसीलिए संवाद में वैसी भाषा नहीं चलती जैसी निबंध में चलती है। निबंध की भाषा सुगठित होती है, संवाद की भाषा स्वाभाविक

प्रारूप

प्रारूप सरल है और वही सबसे अधिक भुला दिया जाता है:

नियमरूप
पात्र का नाम बाईं ओरमोहन —
नाम के बाद योजक या अपूर्ण विराममोहन — / मोहन :
उसके आगे उसका कथनमोहन — तुम कब आए?
हर नया कथन नई पंक्ति में
कोष्ठक में केवल आवश्यक चेष्टा(हँसते हुए)

संवाद लेखन के नियम

नियमकारण
वाक्य छोटे रखिएबोलचाल में लंबे वाक्य नहीं बोले जाते
भाषा पात्र के अनुसारबालक, किसान और अधिकारी एक जैसी भाषा नहीं बोलते
प्रसंग आरंभ में ही स्पष्ट होपाठक को स्थिति तुरंत समझ आनी चाहिए
क्रम टूटे नहींएक पात्र का उत्तर दूसरे के प्रश्न से जुड़ा हो
आरंभ और अंत निश्चितबातचीत कहीं से शुरू होकर कहीं पहुँचे
चेष्टाएँ सीमित मात्रा मेंहर पंक्ति में कोष्ठक संवाद को बोझिल कर देता है

नमूना संवाद — एक

नमूना — दो मित्रों के बीच

राहुल — अरे अनुज! इतने दिनों बाद? कहाँ थे तुम?

अनुज — गाँव गया था। दादा जी की तबीयत ठीक नहीं थी।

राहुल — अब कैसे हैं वे?

अनुज — अब ठीक हैं। दवा चल रही है, पर चलने-फिरने में अब भी कष्ट होता है।

राहुल — (चिंतित होकर) मुझे बता दिया होता, मैं भी साथ चलता।

अनुज — अचानक जाना पड़ा था। लौटते ही तुम्हें बताने ही आ रहा था।

राहुल — अच्छा किया। अब बताओ, पढ़ाई का क्या हुआ?

अनुज — वहीं ले गया था पुस्तकें। दो अध्याय पूरे कर लिए हैं।

राहुल — तब तो चिंता की कोई बात नहीं। शेष मैं समझा दूँगा।

ध्यान दीजिए — इसमें प्रश्न और उत्तर आपस में जुड़े हैं, और अंत में बातचीत एक निष्कर्ष तक पहुँचती है। यही क्रम है।

नमूना संवाद — दो

नमूना — दुकानदार और ग्राहक

ग्राहक — भाई साहब, यह पुस्तक दिखाइए ज़रा।

दुकानदार — यह लीजिए। हिंदी व्याकरण की नई पुस्तक है।

ग्राहक — मूल्य कितना है?

दुकानदार — दो सौ चालीस रुपये।

ग्राहक — कुछ कम कीजिए। पिछली बार भी मैंने यहीं से ली थी।

दुकानदार — मूल्य तो मुद्रित है, पर आप पुराने ग्राहक हैं — दो सौ बीस दे दीजिए।

ग्राहक — ठीक है। एक अभ्यास-पुस्तिका भी साथ रख दीजिए।

बचने योग्य दोष

दोषउदाहरण
वर्णन घुस आनातभी बाहर वर्षा होने लगी और वह उदास हो गया
सब पात्रों की एक जैसी भाषाबालक और शिक्षक का एक-सा शब्द-चयन
कथन अत्यधिक लंबेएक पात्र का आठ पंक्तियों का भाषण
अधूरा अंतबातचीत बीच में ही समाप्त
अनावश्यक कोष्ठकहर पंक्ति में चेष्टा लिखना

अभ्यास

उत्तर देखने से पहले स्वयं सोचें।

  1. संवाद लेखन की सफलता की कसौटी क्या है?

    उत्तरयह कि पढ़ते समय लगे कि पात्र सचमुच बोल रहे हैं — अर्थात् भाषा स्वाभाविक और बोलचाल जैसी हो।

  2. “मोहन ने कहा कि वह थक गया है” — यह संवाद क्यों नहीं है, और इसे संवाद रूप में कैसे लिखेंगे?

    उत्तरयह कथावाचक का वर्णन है, संवाद नहीं। संवाद रूप होगा — मोहन — बहुत थक गया हूँ।

  3. संवाद में पात्रों की भाषा कैसे तय होती है?

    उत्तरपात्र से, लेखक से नहीं। बालक, किसान और अधिकारी की भाषा अलग-अलग होगी; सबके मुँह से एक जैसे शब्द निकालना संवाद को कृत्रिम बना देता है।

  4. कोष्ठक का प्रयोग संवाद में किसलिए होता है?

    उत्तरकेवल आवश्यक चेष्टा या भाव बताने के लिए, जैसे (हँसते हुए) या (चिंतित होकर)। हर पंक्ति में कोष्ठक लगाना संवाद को बोझिल कर देता है।

  5. अच्छे संवाद में “क्रम” से क्या अभिप्राय है?

    उत्तरयह कि एक पात्र का उत्तर दूसरे के प्रश्न या कथन से जुड़ा हो, और बातचीत किसी आरंभ से चलकर किसी निष्कर्ष तक पहुँचे।

सम्बंधित विषय

Type the name in Devanagari or Roman — e.g. संज्ञा या sangya

हिंदी और रोमन — दोनों में खोजा जा सकता है।