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Hindi vyakaran

शब्द विचार (Morphology)

संज्ञा (Noun)

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किसी प्राणी, वस्तु, स्थान, गुण या भाव के नाम को संज्ञा कहते हैं। इसके पाँच भेद हैं।

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इस पृष्ठ में

संसार की हर वस्तु का कोई न कोई नाम होता है। जिस व्यक्ति को हम राम कहकर पुकारते हैं, जिस वस्तु को किताब कहते हैं, जिस स्थान को दिल्ली कहते हैं — ये सब नाम ही संज्ञा हैं। बिना नामों के भाषा संभव ही नहीं होती, इसीलिए संज्ञा को शब्द-भेदों में पहला स्थान दिया जाता है।

उदाहरण

  • राम
  • किताब
  • दिल्ली
  • मिठास
  • सोना
  • सेना

संज्ञा केवल उन्हीं चीज़ों के नाम नहीं होती जिन्हें हम छू सकते हैं। ईमानदारी, क्रोध और बचपन को न देखा जा सकता है, न छुआ — फिर भी ये नाम हैं, इसलिए संज्ञा हैं।

संज्ञा के भेद

पारंपरिक रूप से संज्ञा के तीन मुख्य भेद माने जाते हैं — व्यक्तिवाचक, जातिवाचक और भाववाचक। आधुनिक हिंदी व्याकरण में, अंग्रेज़ी व्याकरण के प्रभाव से, दो भेद और जोड़े जाते हैं — द्रव्यवाचक और समूहवाचक। इस प्रकार कुल पाँच भेद प्रचलित हैं।

1. व्यक्तिवाचक संज्ञा

जो शब्द किसी एक ही विशेष व्यक्ति, वस्तु या स्थान का बोध कराए, वह व्यक्तिवाचक संज्ञा है।

उदाहरण

  • राम
  • गंगा
  • हिमालय
  • भारत
  • रामायण
  • सोमवार

वाक्य में

गंगा हिमालय से निकलती है।

अकबर एक प्रसिद्ध शासक था।

ध्यान रहे कि नदी जातिवाचक है, पर गंगा व्यक्तिवाचक — क्योंकि नदियाँ अनेक हैं, गंगा एक ही है।

2. जातिवाचक संज्ञा

जो शब्द किसी पूरी जाति के सभी प्राणियों या वस्तुओं का बोध कराए, वह जातिवाचक संज्ञा है।

उदाहरण

  • मनुष्य
  • नदी
  • पर्वत
  • पुस्तक
  • नगर
  • गाय

वाक्य में

गाय दूध देती है। — यहाँ किसी एक गाय की नहीं, सारी गायों की बात है।

3. भाववाचक संज्ञा

जिन शब्दों से किसी के गुण, दशा, भाव या व्यापार का बोध हो, वे भाववाचक संज्ञा कहलाते हैं। ये अमूर्त होते हैं — इन्हें देखा या छुआ नहीं जा सकता।

उदाहरण

  • मिठास
  • बचपन
  • क्रोध
  • ईमानदारी
  • थकावट
  • मित्रता

भाववाचक संज्ञाएँ प्रायः अन्य शब्दों से बनती हैं। यही इस भेद की सबसे उपयोगी बात है:

मूल शब्दशब्द-भेदभाववाचक संज्ञा
मित्रजातिवाचक संज्ञामित्रता
बच्चाजातिवाचक संज्ञाबचपन
मीठाविशेषणमिठास
सुंदरविशेषणसुंदरता
चढ़नाक्रियाचढ़ाई
लिखनाक्रियालिखावट
अपनासर्वनामअपनापन

4. द्रव्यवाचक संज्ञा

जो शब्द किसी पदार्थ, धातु या सामग्री का बोध कराए — जिसे गिना नहीं, केवल नापा या तौला जा सकता है — वह द्रव्यवाचक संज्ञा है।

उदाहरण

  • सोना
  • चाँदी
  • पानी
  • दूध
  • तेल
  • गेहूँ

5. समूहवाचक संज्ञा

जो शब्द व्यक्तियों या वस्तुओं के समूह का बोध कराए, वह समूहवाचक संज्ञा है।

उदाहरण

  • सेना
  • सभा
  • कक्षा
  • भीड़
  • गुच्छा
  • परिवार

वाक्य में

सेना सीमा पर तैनात है। — एक सैनिक नहीं, पूरा समूह।

संज्ञा का वाक्य में प्रयोग

वाक्य में संज्ञा अकेली नहीं रहती। उसका रूप लिंग, वचन और कारक के अनुसार बदलता है:

परिवर्तनमूल रूपबदला हुआ रूप
वचनलड़कालड़के
लिंगलड़कालड़की
कारकलड़कालड़के ने

इसी कारण संज्ञा को विकारी शब्द कहा जाता है — अर्थात् ऐसा शब्द जिसमें विकार (परिवर्तन) होता है।

एक ही शब्द, अलग-अलग भेद

कई बार एक ही शब्द प्रसंग के अनुसार अलग-अलग भेद का हो जाता है। यही वह जगह है जहाँ सबसे अधिक भ्रम होता है।

तुलना कीजिए

पुरी जगन्नाथ के लिए प्रसिद्ध है। — व्यक्तिवाचक (एक विशेष नगर)

हिमालय भारत की शान है। — भाववाचक (गौरव का भाव)

हमारे नगर में तीन पुरी हैं। — जातिवाचक (नगर के अर्थ में)

अभ्यास

उत्तर देखने से पहले स्वयं सोचें।

  1. “हिमालय भारत के उत्तर में है।” — इस वाक्य में हिमालय कौन-सी संज्ञा है?

    उत्तरव्यक्तिवाचक संज्ञा — क्योंकि हिमालय एक ही विशेष पर्वत का नाम है, सभी पर्वतों का नहीं।

  2. “मीठा” से भाववाचक संज्ञा बनाइए।

    उत्तरमिठास। (विशेषण से भाववाचक संज्ञा बनी।)

  3. “सेना”, “सोना” और “सुंदरता” — इनके भेद क्रमशः बताइए।

    उत्तरसेना — समूहवाचक, सोना — द्रव्यवाचक, सुंदरता — भाववाचक।

  4. क्या “नदी” व्यक्तिवाचक संज्ञा है? कारण सहित बताइए।

    उत्तरनहीं, यह जातिवाचक है, क्योंकि यह किसी एक नदी का नहीं बल्कि सभी नदियों का बोध कराती है। “गंगा” व्यक्तिवाचक होगी।

  5. संज्ञा को विकारी शब्द क्यों कहा जाता है?

    उत्तरक्योंकि लिंग, वचन और कारक के अनुसार उसका रूप बदल जाता है — जैसे लड़का से लड़के, लड़की, लड़के ने।

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Type the name in Devanagari or Roman — e.g. संज्ञा या sangya

हिंदी और रोमन — दोनों में खोजा जा सकता है।