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शब्द भंडार (Vocabulary)

लोकोक्तियाँ (Proverbs)

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लोक-अनुभव से बने पूर्ण वाक्य, जो किसी स्थिति पर एक सिद्ध टिप्पणी की तरह ज्यों के त्यों प्रयुक्त होते हैं।

मध्यम विस्तृत विवेचन अंतिम बदलाव
इस पृष्ठ में

नाच न जाने आँगन टेढ़ा — यह वाक्य किसी नाचने वाले के बारे में नहीं है। यह उस हर व्यक्ति के बारे में है जो अपनी अयोग्यता का दोष परिस्थिति पर डाल देता है।

ऐसे कथन लोकोक्ति या कहावत कहलाते हैं। ये लोक-जीवन के लंबे अनुभव से बने हैं, इसलिए इनमें एक निर्णय जैसा भार होता है।

सीख देने वाली लोकोक्तियाँ

लोकोक्तिअर्थ
अब पछताए होत क्या जब चिड़िया चुग गई खेतअवसर बीत जाने पर पछताना व्यर्थ है
जैसी करनी वैसी भरनीजैसा कर्म वैसा फल
अपनी करनी पार उतरनीअपने कर्म ही काम आते हैं
दूध का जला छाछ भी फूँक-फूँककर पीता हैएक बार धोखा खाया व्यक्ति अत्यधिक सावधान हो जाता है
आगे कुआँ पीछे खाईदोनों ओर संकट
डूबते को तिनके का सहारासंकट में थोड़ी सहायता भी बड़ी लगती है
मन चंगा तो कठौती में गंगामन शुद्ध हो तो बाहरी आडंबर की आवश्यकता नहीं

दिखावे और पाखंड पर

लोकोक्तिअर्थ
थोथा चना बाजे घनाकम गुण वाला अधिक बखान करता है
अधजल गगरी छलकत जायअल्पज्ञ व्यक्ति अधिक इतराता है
ऊँची दुकान फीका पकवाननाम बड़ा, गुण कम
हाथी के दाँत खाने के और दिखाने के औरकथनी और करनी में अंतर
ओछे की प्रीति बालू की भीतनीच व्यक्ति का प्रेम टिकाऊ नहीं होता
चोर की दाढ़ी में तिनकाअपराधी स्वयं प्रकट हो जाता है
नाच न जाने आँगन टेढ़ाअपनी अयोग्यता का दोष दूसरों पर डालना

सामर्थ्य और स्थिति पर

लोकोक्तिअर्थ
जिसकी लाठी उसकी भैंसजो बलवान है, अधिकार उसी का
अंधों में काना राजाअयोग्यों के बीच थोड़ा योग्य भी बड़ा माना जाता है
एक अनार सौ बीमारवस्तु कम, चाहने वाले अधिक
एक हाथ से ताली नहीं बजतीझगड़े में दोनों पक्षों का दोष होता है
सौ सुनार की एक लुहार कीकमज़ोर के सौ वारों पर बलवान का एक वार भारी
घर का भेदी लंका ढाएअपनों की फूट से ही बड़ा नुक़सान होता है
न रहेगा बाँस न बजेगी बाँसुरीकारण ही मिटा दो, परिणाम स्वयं मिट जाएगा
आ बैल मुझे मारजान-बूझकर संकट मोल लेना

लाभ और व्यवहार पर

लोकोक्तिअर्थ
आम के आम गुठलियों के दामएक काम से दोहरा लाभ
नौ नकद न तेरह उधारउधार के अधिक से नकद कम भला
बंदर क्या जाने अदरक का स्वादगुणहीन व्यक्ति गुण की पहचान नहीं कर सकता
काला अक्षर भैंस बराबरपूर्णतः निरक्षर होना
खग जाने खग ही की भाषासमान प्रवृत्ति वाले ही एक-दूसरे को समझते हैं
लातों के भूत बातों से नहीं मानतेकुछ लोग समझाने से नहीं, कठोरता से मानते हैं
बिन माँगे मोती मिले, माँगे मिले न भीखमाँगने से स्वाभिमान घटता है

प्रसंग में प्रयोग

लोकोक्ति का प्रयोग टिप्पणी की तरह होता है — प्रायः वाक्य के अंत में, स्थिति का निचोड़ देते हुए।

वाक्य में

परीक्षा के एक दिन पहले पुस्तक खोलकर वह पछता रहा था — अब पछताए होत क्या जब चिड़िया चुग गई खेत।

अपनी तैयारी की कमी छिपाकर वह प्रश्न-पत्र को कठिन बता रहा था; सच ही कहा है — नाच न जाने आँगन टेढ़ा।

उसने पुरानी साइकिल बेचकर उसी पैसे से नई ले ली — आम के आम गुठलियों के दाम।

अभ्यास

उत्तर देखने से पहले स्वयं सोचें।

  1. किसी कथन के मुहावरा या लोकोक्ति होने का सरल परीक्षण क्या है?

    उत्तरयह देखिए कि वह अकेला पूरा वाक्य बनता है या नहीं। “नाक में दम करना” अधूरा है, अतः मुहावरा। “नाच न जाने आँगन टेढ़ा” पूरा वाक्य है, अतः लोकोक्ति।

  2. “थोथा चना बाजे घना” का अर्थ लिखिए।

    उत्तरजिसमें गुण या ज्ञान कम होता है, वही सबसे अधिक बखान और शोर करता है।

  3. “घर का भेदी लंका ढाए” किस स्थिति पर कही जाएगी?

    उत्तरजब अपने ही पक्ष के किसी व्यक्ति के भेद खोल देने से बड़ा नुक़सान हो जाए।

  4. “आम के आम गुठलियों के दाम” का भाव स्पष्ट कीजिए।

    उत्तरएक ही काम से दोहरा लाभ मिल जाना — मुख्य लाभ भी और उसके साथ अतिरिक्त लाभ भी।

  5. लोकोक्ति का रूप वाक्य के अनुसार क्यों नहीं बदला जाता?

    उत्तरक्योंकि लोकोक्ति स्वयं एक पूर्ण और रूढ़ कथन है, वाक्य का अंश नहीं। उसे बदल देने पर वह लोकोक्ति न रहकर मुहावरे जैसी हो जाती है।

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