मुख्य सामग्री पर जाएँ
Hindi vyakaran

वर्ण विचार (Phonology)

वर्णमाला (Alphabet)

Download PDF

वर्णों के व्यवस्थित समूह को वर्णमाला कहते हैं। हिंदी में 11 स्वर और 33 व्यंजन हैं।

आधार आरंभिक अवधारणा अंतिम बदलाव
इस पृष्ठ में

बोलते समय हमारे मुँह से जो ध्वनि निकलती है, उसे लिखने के लिए जो चिह्न बनाया जाता है — वही वर्ण है। को और तोड़ा नहीं जा सकता, इसलिए वह एक वर्ण है। इसके विपरीत कल को और में तोड़ा जा सकता है, इसलिए वह वर्ण नहीं, शब्द है।

वर्ण के भेद

उच्चारण के आधार पर वर्ण दो प्रकार के होते हैं।

1. स्वर

जिन वर्णों का उच्चारण बिना किसी दूसरे वर्ण की सहायता के होता है, वे स्वर कहलाते हैं। हिंदी में मूल स्वर ग्यारह माने जाते हैं।

उदाहरण

उच्चारण में लगने वाले समय के आधार पर स्वरों के तीन भेद हैं:

भेदउच्चारण-कालस्वर
ह्रस्वसबसे कम (एक मात्रा)अ, इ, उ, ऋ
दीर्घह्रस्व से दुगुनाआ, ई, ऊ, ए, ऐ, ओ, औ
प्लुतदीर्घ से भी अधिकओ३म् (केवल पुकारने में)

2. व्यंजन

जिन वर्णों का उच्चारण स्वर की सहायता से होता है, वे व्यंजन कहलाते हैं। हर व्यंजन में पहले से मिला होता है — वस्तुतः क् + अ है।

हिंदी में व्यंजन तैंतीस हैं, जो तीन वर्गों में बँटे हैं।

स्पर्श व्यंजन

इनके उच्चारण में जीभ मुख के किसी भाग को स्पर्श करती है। ये पच्चीस हैं, पाँच वर्गों में:

वर्गव्यंजनउच्चारण-स्थान
क वर्गक, ख, ग, घ, ङकंठ
च वर्गच, छ, ज, झ, ञतालु
ट वर्गट, ठ, ड, ढ, णमूर्धा
त वर्गत, थ, द, ध, नदंत
प वर्गप, फ, ब, भ, मओष्ठ

अंतःस्थ व्यंजन

ये स्वर और व्यंजन के बीच की स्थिति में हैं — चार हैं।

उदाहरण

ऊष्म व्यंजन

इनके उच्चारण में हवा रगड़ खाकर निकलती है, जिससे ऊष्मा उत्पन्न होती है — ये भी चार हैं।

उदाहरण

अयोगवाह

अं (अनुस्वार) और अः (विसर्ग) न पूरी तरह स्वर हैं, न व्यंजन। ये स्वर के बाद आते हैं पर उच्चारण में व्यंजन जैसे हैं, इसलिए इन्हें अयोगवाह कहते हैं।

चिह्ननामउदाहरण
अनुस्वारगंगा, अंग, हंस
अनुनासिक (चंद्रबिंदु)चाँद, आँख, हँसना
विसर्गदुःख, अतः, प्रातः

संयुक्त व्यंजन

दो या अधिक व्यंजन मिलकर एक नया रूप बना लेते हैं। हिंदी में चार संयुक्त व्यंजन प्रमुख हैं:

संयुक्त व्यंजनबना हैउदाहरण
क्षक् + षक्षमा, रक्षा
त्रत् + रत्रिशूल, पत्र
ज्ञज् + ञज्ञान, विज्ञान
श्रश् + रश्रम, श्रद्धा

मात्राएँ

जब स्वर व्यंजन के साथ जुड़ता है, तो वह अपने पूर्ण रूप में नहीं, मात्रा के रूप में लिखा जाता है।

स्वरमात्राउदाहरण
कोई चिह्न नहीं
का
िकि
की
कु
कू
के
कै
को
कौ

की कोई मात्रा नहीं होती, क्योंकि वह हर व्यंजन में पहले से मौजूद है। जब उसे हटाना हो, तो नीचे हलंत (्) लगाते हैं — जैसे क्

अभ्यास

उत्तर देखने से पहले स्वयं सोचें।

  1. हिंदी में मूल स्वर और व्यंजन कितने हैं?

    उत्तर11 स्वर और 33 व्यंजन।

  2. “हंस” और “हँस” में क्या अंतर है?

    उत्तर“हंस” में अनुस्वार है और वह एक पक्षी का नाम है; “हँस” में अनुनासिक है और वह हँसने की क्रिया है। बिंदु का प्रकार बदलते ही अर्थ बदल जाता है।

  3. “ज्ञ” किन दो वर्णों से मिलकर बना है?

    उत्तरज् + ञ।

  4. “ट, ठ, ड, ढ, ण” का उच्चारण-स्थान क्या है?

    उत्तरमूर्धा। ये मूर्धन्य व्यंजन हैं और ट वर्ग कहलाते हैं।

  5. अयोगवाह किन्हें कहते हैं और क्यों?

    उत्तरअनुस्वार (अं) और विसर्ग (अः) को, क्योंकि ये न पूर्णतः स्वर हैं न व्यंजन — स्वर के बाद आते हैं पर उच्चारण में व्यंजन जैसे हैं।

सम्बंधित विषय

Type the name in Devanagari or Roman — e.g. संज्ञा या sangya

हिंदी और रोमन — दोनों में खोजा जा सकता है।